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ढाई आखर का प्रेम

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भँवरे का कली संग, बरखा का बादलों संग, चाँद का चकोर से, कृष्ण का राधा से, यही है प्रेम । वो रिश्ता जिसका कोई नाम नहीं , ना रूप, ना आकार । जिसमे ना अपेक्षाएं, न स्वार्थ, यह है प्रेम । एक ऐसी भावना, जिसके वशीभूत हो तरंगिनी सागर से जा मिले , किन्तु वह मिलन दिखाई ना दे । सूर्य को प्रेम है प्रकृति से । अपनी रश्मियाँ वह हरेक कली, फूल, वृक्ष व् प्राणी पर समान रूप से लुटाता है । मेघ अपनी प्रेम की बूंदों से अभिसिंचित करता है धरती को । उसकी बूँदें नेह बन जब बरसती हैं तब मुरझाई प्रकृति में प्राण आ जाते हैं , यही है प्रेम । पंछियों को प्रेम है उन्मुक्त आकश से , जहाँ वे स्वच्छंद उड़ते-फिरते हैं । कलरव करते हैं । प्रेम वह भावना है जिसमे अनेक रंग समाहित हैं - आनंद , ईर्ष्या, पीड़ा , त्याग, समर्पण आदि । इस पूरी कायनात में इंसान का प्रेम सर्वाधिक प्रायोगिक है । कई बार इस भावना में सराबोर वह आकंठ डूबा रहता है , कभी ईर्ष्यावश द्वेष की भावना उपजा लेता है, कभी वह पीड़ा में बोझिल दिन-रात दर्द सहता है, कभी समर्पण में आंतरिक सुख की अनुभूति करता है । प्रेम वह भावना है जहाँ सारे स्वार्थ सिमट जाते हैं, ...

भ्रष्टाचार

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आज फिर अटक गयी नज़र मुख्य पृष्ठ की हेडलाइन पर आजकल कमबख्त अखबार सुनाता है बस यही समाचार - पीडब्ल्यूडी विभाग का है इंजीनियर लाखों दबा लिए अंदर-ही-अंदर ... खोला गया जब, जनाब का लॉकर उगले उसने लाखों के जेवर सोना-चाँदी- हीरे , नगदी और एफ.डी. और ज़मींन-जायदाद के पेपर ... विभाग के ही एक प्रतिद्वंदी ने, की थी आयकर विभाग को खबर पूछताछ में इधर - गिड़गिड़ाया इंजीनियर - हुज़ूर,  मैं तो इक छोटा सा मोहरा हूँ क्यूँ मेरी गर्दन दबा रहे हैं पकड़ो उन अफसरों को जो मेरे मार्फ़त खा रहे हैं ... किन्तु ये ना भूलना साहब, लिस्ट में आपके अफसरों के भी, नाम आ रहे हैं ...... देता हूँ सबूत संग, नामों की लिस्ट क्या पकड़ पायेंगे ,उन लोगों की रिस्ट ....??? खा गया लिस्ट देख कर चक्कर, वो बेचारा आयकर का ईमानदार अफसर किस नेता को छोडूँ, किस अफसर को पकडूँ ये तो सारे-के-सारे , हैं घनचक्कर । इसीलिए मेरा ये देश लुटा जा रहा है लुट गयी सोने की चिड़िया, सिस्टम अब उसका माँस भी खा रहा है ... - रोली

विश्व महिला दिवस !!!

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हम सिर्फ आज ही के दिन नारी के अधिकार व उसके अस्तित्व की बातें करते हैं, क्यों ? नारी जननि है | घर की इज्ज़त है | पिता का अभिमान, भाई का मान व ससुराल का सम्मान है, जिस पर कभी ठेस नहीं लगनी चाहिए , किन्तु वह स्वयं के लिए क्या है ??? महिलाएं कई प्रकार की होती हैं - शिक्षित महिलाएं, आत्म-निर्भर महिलाएं, घरेलू महिला, समाज-सेविका, संघर्षरत महिला, ग्रामीण महिला, दमित महिला, क्रांतिकारी नारी , समाज सेविका, उपभोग के लिए उपलब्ध नारी, उच्च पदस्थ महिला, राजनीति में सक्रीय नारी , मजदूर स्त्री आदि-आदि | शहरों व महानगरों की महिलाएं निश्चित ही काफी हद तक स्वतंत्र हैं | रहन-सहन, वेश-भूषा, निर्णय लेने के अधिकार, आत्मनिर्भरता यह सब उनके अधिकार क्षेत्र में है किन्तु नारी तो वो भी है जो हाथ भर का घूँघट निकाल कर आज भी डोली में बैठ कर जिस देहरी के अंदर आती है, उसकी अर्थी ही उसे लांघ पाती है | इसके बहुत से कारण है - अशिक्षा , रूढिवादिता , दकियानूसी परम्परायें | जींस पहन कर फर्राटेदार अंग्रेजी बोलना आधुनिकता नहीं है | फेसबुक, ट्विटर, कम्पूटर, लैपटॉप, टैब , मोबाइल आदि की अधिकतम जानकरी रखना आधुनिकता नहीं...
####################################### चलो अब मै आसिम् ही सही तेरी निगाहों में ना भूलना वो लम्हें जो गुज़ारे मेरी पनाहों में - रोली (आसिम् - पापी) #######################################
........................................................................ कहाँ रही अब वो शिद्दत किसी उल्फत में, कि आँखें भर आती थीं सिर्फ नाम लेने से ... - रोली .........................................................................
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, एक अदद मुस्कुराहट, कितने काम कर जाती है... मेरे गम छुपा कर खुशियाँ, तेरे नाम कर जाती है.. - रोली ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
'''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''' ख़्वाबों को बुला लूँ लेकिन पलकों में नींद तो आये ... मुन्तज़िर ही रहे हम तो तुम्हारे दीदार के हरदम..... - रोली ''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''