तन्हाई
उसका ज़िक्र जो हम, हर रोज किया करते हैं इस बहाने उसमे हम, खुद को जिया करते हैं उसकी बातें वो मुलाकातें और वो यादें प्यारी यूँ मिला कर ज़हर, अमृत में पिया करते हैं वो दरख़्त, जहाँ दस्तखत आज भी हैं दोनों के देख कर उनको, ज़ख्मे-ए-दिल सिया करते हैं तेरी पायल के टूटे घुंघरू, उठाये थे जो चुपके से अब भी सन्नाटे में वो, छम से बजा करते हैं गैर हो तुम, अब ना रहा हक़ तुम पर मेरा लेकिन इंतज़ार तेरे आने का रोज किया करते हैं ना डर इतना , मुझे भी फिक्र है ज़माने की, खुद रुसवा हो के भी तेरी पर्दानशीनी का ख़याल किया करते हैं......... - रोली ...

अरे वाह प्रणव जी,
ReplyDeleteसजीव चित्र उतार दिया आपने तो...बहुत खूब!
अच्छा किया रेडक्रॉस का कार्टून बनाया हमीदिया
का नहीं वर्ना बहुत सारी अव्यवस्थाएं दिखानी पड़ती!
भोपाल जिला न्यायलय का कार्टून बनाइये ना कभी,
आप अच्छा बना लेंगे!
"धन्यवाद रोली जी कि आपको पसन्द आया...अब तो रेडक्रास भी काफी बदल गया है वैसे सेशन कोर्ट पर भी एक बनाया था "cross xamination of a rape victim in session court" इसके लिये मैं कोर्ट भी गया था कार्यवाही देखने......"
ReplyDeleteamitraghat.blogspot.com
mujhe to parliament lag raha hai..word verification to hta de plz
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