असली-नकली....
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वो भावनाएं जो अभिव्यक्त नहीं हो पातीं वो शब्द जो ज़ुबाँ पे आने से कतराते हैं इन्द्रधनुष के वो रंग जो कैनवास पर तो उतर जाते हैं पर दिल में नहीं...वो विचार जो मस्तिष्क में उथल-पुथल मचाते हैं पर बाहर नहीं आ पाते... उन्हीं को अपनी रौशनाई में ढाल कर आवाज़ दी है शब्द दिए हैं...और इस ब्लॉग पर बिखेरा है..बस एक प्रयास है...कोशिश है..... मेरी ये.....आवाज़
सुनती थी साधू-संत मिलते हैं हिमालय में,
यही है ज़िन्दगी का सच्…………हर शख्स के चेहरे पर एक चेहरा लगा है।
ReplyDeleteसच य दोहरी ज़िन्दगी जीने वाले बहुत तंग करते हैं।
ReplyDeleteधन्यवाद वन्दना जी और मनोज जी........
ReplyDeleteSatya_Wachan Roli Behan...
ReplyDeleteThanks Kamal Bhaiya....
ReplyDeleteNakabposho ne jina dushwar kar diya hai. Thik nishana sadha. Badhai
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