वो भावनाएं जो अभिव्यक्त नहीं हो पातीं वो शब्द जो ज़ुबाँ पे आने से कतराते हैं इन्द्रधनुष के वो रंग जो कैनवास पर तो उतर जाते हैं पर दिल में नहीं...वो विचार जो मस्तिष्क में उथल-पुथल मचाते हैं पर बाहर नहीं आ पाते... उन्हीं को अपनी रौशनाई में ढाल कर आवाज़ दी है शब्द दिए हैं...और इस ब्लॉग पर बिखेरा है..बस एक प्रयास है...कोशिश है..... मेरी ये.....आवाज़
Waah waah..Kya baat hai...Beautifulllll
ReplyDeleteभोली सी ख्वाहिश
ReplyDeleteखुबसूरत ख्वाहिश...
ReplyDeleteशुक्रिया........आप सभी प्रिय मित्रों को...
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ReplyDelete♥
रोली जी
ख़ूब लिखा है -
तुम भी तो कभी हमें मनाया करो …
और श्रेष्ठ सृजन की शुभकामनाओं सहित…
- राजेन्द्र स्वर्णकार