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पलकों पे ख्वाब नहीं हैं तो अब मेरी रात नहीं होती पहले की तरह अब मेरी, मुझ से ही बात नहीं होती पहले तो अक्सर अपने साये से मिल लेते थे हम क्या कहें कि खुद से ही अब, मुलाक़ात नहीं होती........ - रोली
कभी उछलती कभी फुदकती गेंद की तरह कभी मचलती कभी संभलती लहर की तरह कभी मीलों अकेली है साहिल की तरह कभी शोर में डूबी हुयी मेले की तरह कभी ग़मगीन कभी परेशान इंसान की तरह कभी मासूम कभी नादान बच्चे की तरह एक रूप नहीं है इसका बहुरूपिया है यह "ज़िन्दगी" नाम है इसका जीना है किसी तरह........................... -रोली....
सोचती थी समय गया,वयस गयी, अब वो भावनाएं शायद ना रहीं वो चाँद में तुम्हारा नज़र आना, वो अक्सर उपहारों का नज़राना, बीतते वक़्त ने धुंधला दिया था सब कुछ हमने भुला दिया था ... किन्तु हो रहा महसूस अब यह, है सबकुछ वही बस नाम नए, प्रेम अब त्याग और समर्पण है हमारे ह्रदय एक-दूजे का दर्पण हैं चाँद उन बच्चों की लोरी में है जो तुमने दिए उपहार में...... है सबकुछ वही, बस नाम नए.. बस नाम नए......................... -रोली
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सोचती थी ,मन में मेरे , प्रेम शायद अब नहीं है , भूल थी वो, कैसे हो ये, जबकि तन में बसा ह्रदय है, ना यहाँ बंधन वयस का, ना ही वर्षों का समय है , तेरा न होना ही बस इक, मेरे जीवन का तमस है ..... साथ चाहूँ मै तुम्हारा, तुम सूर्य बन हरते रहो तम, धरा और किरणों का तुम्हारी, जैसे हो रहा समागम........... -रोली
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ह्रदय से उठती कसक, सफ़र तय करके पहुँची, जिस्म से रूह तक, यादें बन गयीं आँसू आते-आते नैनो तक..... क्या इस खारे पानी में सिमट कर तुम बह जाओगे !!! या और भी भीतर समा जाओगे, मेरे अंतर्मन तक................! चाहूँ बस जाना तुम्हारे जिस्म के हरेक कतरे में, जीवनदायिनी हर साँस में, हर धड़कन में हर प्यास में, हर कसमो में हर वादों में, तुम्हारे मजबूत इरादों में......................... तब तो रुक जाओगे न तुम !!! फिर कहीं न जाओगे तुम.........! रोक लूंगी,समेट लूंगी,  अब ये आँसू नैनो में..... ना बहने दूँगी  मै, इन स्वर्णिम यादों को...... प्रिय, तुम्हारी यादों को ..... -रोली.
चाँद से भले हो जाये अनबन रात को तुम्हारी, बस उसकी चाँदनी को तुम नाराज़ ना करना...... हमसे खफा हो भी जाओ तो कोई बात नहीं, खुद से वाबस्ता ख़्वाबों को हमसे जुदा न करना...... -रोली
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आधी ज़िन्दगी इंतज़ार में गुजरी और आधी ख्वाबों में गुज़र जाती है... देखती हूँ आइना जब याद करके तुम्हे, मेरी सूरत खुद ही संवर जाती है.... -रोली.