तन्हाई
उसका ज़िक्र जो हम, हर रोज किया करते हैं इस बहाने उसमे हम, खुद को जिया करते हैं उसकी बातें वो मुलाकातें और वो यादें प्यारी यूँ मिला कर ज़हर, अमृत में पिया करते हैं वो दरख़्त, जहाँ दस्तखत आज भी हैं दोनों के देख कर उनको, ज़ख्मे-ए-दिल सिया करते हैं तेरी पायल के टूटे घुंघरू, उठाये थे जो चुपके से अब भी सन्नाटे में वो, छम से बजा करते हैं गैर हो तुम, अब ना रहा हक़ तुम पर मेरा लेकिन इंतज़ार तेरे आने का रोज किया करते हैं ना डर इतना , मुझे भी फिक्र है ज़माने की, खुद रुसवा हो के भी तेरी पर्दानशीनी का ख़याल किया करते हैं......... - रोली ...

नववर्ष 2014 सभी के लिये मंगलमय हो ,सुखकारी हो , आल्हादकारी हो
ReplyDeleteधन्यवाद वंदना जी :)
Delete"happy new year......
ReplyDelete:) धन्यवाद....आभार |
Deleteभावो की
ReplyDeleteबेहतरीन........आपको भी नववर्ष की शुभकामनायें
सुषमा जी ,
Deleteआभार...बहुत-बहुत शुक्रिया |