ये बरस भी चुक गया...

ये बरस भी चुक गया
स्मृतियों को सहेज,
दर्द से लबरेज़ गया...

कुछ दिन मीठे
कुछ खट्टे से,
कुछ कतरे वादों के
कुछ धागे यादों के,
पाती में भेज गया
ये बरस भी चुक गया...

स्वप्न दिखाए
अश्रु भी लाये
और कुछ मुस्कुराहटें
आँचल में सहेज गया
ये बरस भी चुक गया...

- रोली

Comments

  1. नववर्ष 2014 सभी के लिये मंगलमय हो ,सुखकारी हो , आल्हादकारी हो

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  2. भावो की
    बेहतरीन........आपको भी नववर्ष की शुभकामनायें

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    1. सुषमा जी ,
      आभार...बहुत-बहुत शुक्रिया |

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