Saturday, August 14, 2010


मेरे ब्लॉग के सभी सदस्यों को आज़ादी का ये महापर्व शुभ हो...
स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई....
वन्दे मातरम..

Wednesday, August 11, 2010

कश्मीर की सरकार से गुहार..


सुलग रहा है मेरा मन क्यों...
जल रहा है मेरा तन क्यों.....
मेरी बर्फीली वादियों में,
नफरत की लगी अगन क्यों....
मेघाच्छादित हिम पर्वत पर,
बरस रहें है शोले क्यों.......
मेरी शीतल डल-झील का,
रंग हो गया रक्तिम सा क्यों....
कहाँ गए वो रंगीं शिकारे,
हर इन्सां स्तब्ध सा है क्यों....
देवदार औ चीड पर मेरे,
हिमपात नहीं, अंगारे हैं क्यों....
इस गुलज़ार हंसीं घाटी पे,
कर्फ्यू का है सन्नाटा क्यों......
धरती पर एक स्वर्ग यहीं था,
बना दिया इसे जहन्नुम क्यों....
मात्रभूमि का घूँघट हूँ मै,
मेरी तुम लाज, बचाते नहीं क्यों.....
और उजाड़ेंगे ये कितना,
हैवानो से मुझे बचाते नहीं क्यों........
पास है "पंद्रह-अगस्त" का वो दिन,
किन्तु, मुझे आजाद कराते नहीं क्यों...
आतंकवाद की बेड़ियों से,
तुम निजात दिलाते नहीं क्यों....
हाथों में क्या लगी है मेहँदी,
अब हथियार उठाते नहीं क्यों....???
अब हथियार उठाते नहीं क्यों....???

- रोली पाठक
http://wwwrolipathak.blogspot.com/