Thursday, October 21, 2010

अधूरी दास्ताँ......

एक सदा थी, एक अदा थी

एक हया थी, एक वफ़ा थी

एक प्रेम का वादा था

एक मज़बूत इरादा था

एक सुहाना सपना था

एक अफसाना अपना था

एक राह भी थी, एक मंजिल भी...

दो कोमल प्यार भरे दिल भी...

एक तरफ सारा संसार

एक तरफ था मेरा प्यार

फिर, वही हुआ जो जग की रीत...

जग जीता, और हारी प्रीत...

बिछड़ गया मेरा मनमीत...

बिछड़ गया मेरा मनमीत...

-रोली पाठक

Tuesday, October 19, 2010

दुर्भाग्य.....

राह तकते
नयन सूने

ना काजल ना चूड़ी

ना बिंदिया ना गहने

शून्य में ताकती,

रीति अंखियों से जागती,

पीड़ा से कभी चित्कारती,

उन्मादित हो, उसे पुकारती,

सब कुछ तो है जानती वह,

फिर भी क्यों ना मानती वह,

उजड़ गया रंग लाल उसका,

अब ना आयेगा कभी वह वो,

जिससे था श्रृंगार उसका...

मुस्कुराते, वह गया था

लौटता हूँ, यह कहा था

निर्जीव देह यूँ आयेगी

यह किसी को, क्या पता था...

स्टेशन के जिस कोने में,

उसका नवीन सहचर खड़ा था

आतंक का बम,

वहीँ फटा था...

मृत्यु का यम,

वहीँ खडा था....

वहीँ खड़ा था.....

-रोली पाठक


(यह कविता मैंने मुंबई सीरिअल ब्लास्ट्स के बाद टीवी पर पीड़ितों के इंटरव्यू देखने के बाद लिखी थी )

Monday, October 11, 2010

सत्य की राह....

 सत्य की बड़ी कठिन डगर है....

चलना उस पर, अति दूभर है...

राह में कंटक पड़े हैं देखो,

जेठ महीने सी दोपहर है...

सत्य की बड़ी कठिन डगर है...



झूठ खड़ा मुसकाय हर डग,

हमको बड़ा लुभाय हर डग,

फूल-ही-फूल बिछाय हर पग,

सत्य तो बरपाए कहर है...

सत्य की, बड़ी कठिन डगर है...



झूठ दिलाये जीवन में सुख

सत्य की राह में बहुत हैं दुःख

धन-दौलत और ऐशो-आराम....

झूठ के दूजे हैं उपनाम...

सत्य की चादर फटी हुई है...

थाली में सूखी रोटी है...

सत्य की, बड़ी कठिन डगर है....



किन्तु,

मिले जीत कंटक पे चल कर..

पाऊँ मंजिल सूर्य में तप कर...

जलती धरा पे पाँव जला कर...

सत्य को अपने ह्रदय लगा कर...

चलता चलूँ सत्य के पथ पर...

भले सत्य की, कठिन डगर है...



बने सूर्य शीतल जलधारा...

राह के कंटक करें किनारा...

जेठ महीना लगे सावन है...

सत्य का अंत बड़ा पावन है....

राह कठिन तो क्या होता है,

अंत में झूठ करे क्रंदन है...

डगर सत्य की ही जीवन है...

डगर सत्य की ही जीवन है...


-रोली पाठक









Friday, October 8, 2010

जय माता दी.....




 सर्व मंगल मांगलेय
शिवे सर्वार्थ साधिके
शरण्ये त्रिअम्बिके गौरी
नारायणी नमोस्तुते...
मेरे ब्लॉग के सभी सदस्यों को शारदेय नवरात्र पर्व की हार्दिक शुभकामनाये....