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Showing posts from January, 2013

बेबसी

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कैसी है उलझन जो सुलझती नहीं
गांठे रिश्तों की अब खुलती नहीं ............
चाहूँ सीधे रास्तों पे सफर तय करना
इस तरह मंजिल मगर मिलती नहीं ........

गीत तो कई सजे हुए हैं मेरे अधरों पर ,
क्या करूँ कि मन वीणा अब बजती नहीं ......
निर्झरिणी सा बहे जा रहा मेरा ये मन ,
काया है वहीँ जहाँ खुशियाँ मुझे मिलती नहीं ...........

रहना होगा जंजीर से जकड़ी हुई इस देह को,
पीड़ा रिश्तों की मगर, देख सकती नहीं.....
चाहूँ मै, कि तोड़ दूँ ये सारे मिथ्या बंधन ,
किन्तु नारी हूँ...पाषाण मै बन सकती नहीं..........

- रोली
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खामोश सर्द शाम आती है तेरे ख़याल लेकर
उनकी गर्माहट में हम तो डूबते ही जाते हैं
अलाव की आंच भी बुझ जाती है और हम
ठंडी राख में तेरी गुनगुनी यादों को पाते हैं

- रोली


हर  कफस को लिपट कर कफ़न में कब्र तक जाना है
खाम-खां तिश्नगी दिल में लिए  फिरता ये ज़माना है

(कफस - शरीर/पिंजरा , तिश्नगी - प्यास)

- रोली

|| वंदे मातरम ||

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भारतीय सेना दिवस की हार्दिक शुभकामनायें
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लेफ्टिनेंट जनरल (बाद में फील्ड मार्शल)
के एम करियप्पा ने आज के दिन
(15 जनवरी 1948) भारतीय सेना के पहले भारतीय कमांडिग इन चीफ के रूप में वर्ष 1948 में अंतिम ब्रिटिश कमांडर सर फैंसिस बुचर से पदभार संभाला था. इस तरह लेफ्टिनेंट करियप्पा लोकतांत्रिक भारत के पहले सेना प्रमुख बने |
इसी की याद में भारत में हर साल 15 जनवरी को सेना दिवस मनाया जाता है. इस दिन की शुरुआत यहां इंडिया गेट पर बनी अमर जवान ज्योति पर शहीदों को श्रद्धांजलि देने के साथ होती है |
इस दिन राजधानी दिल्ली और सेना के सभी छह कमान मुख्यालयों में परेड आयोजित की जाती है और सेना अपनी मारक क्षमता का प्रदर्शन करती है. इस मौके पर सेना के अत्याधुनिक हथियारों और साजो सामान जैसे टैंक, मिसाइल, बख्तरबंद वाहन आदि प्रदर्शित किये जाते हैं |
इस दिन सेना प्रमुख दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देने वाले जवानों और जंग के दौरान देश के लिये बलिदान करने वाले शहीदों की विधवाओं को सेना मेडल और अन्य पुरस्कारों से सम्मानित करते हैं |
भारतीय सेना अपने सेवानिवृत्त सैनिकों, …
लहू सर्द हो कर जम गया ......
कहने को हममे अब भी जान बाकी है 
सर कलम कर के वो ज़ालिम ले गए,
ना जाने अब कौन सा इम्तेहान बाकी है 

- रोली

( सीमा पर दो जवानों के सर काट दिए गए । सादर श्रृद्धांजलि )