Monday, December 31, 2012

नव वर्ष


जा रहा एक और वर्ष हमसे विलग होकर
कई रक्तरंजित देह, छलनी आत्मा देकर

हो चुकी वीलीन पंचतत्व में जिसकी  देह
माँ उसे पुचकारती थी हौले-हौले से छूकर

एक नहीं है, सैकड़ों हैं -  "दामिनी" यहाँ
दे रहीं हमको सदाएं जो आज मरमरकर

आओ शपथ लें दामिनी को तेज वह  देंगे
जैसे चमकती नभ में वैसी शक्ति हम देंगे

नव चेतना की वंदना, नारी को हम मुस्कान दें
नव जागृति की प्रार्थना नारी को हम सम्मान दें
मान दें, सम्मान दें, उसको नयी पहचान दें |

- रोली पाठक

Saturday, December 29, 2012

|| भावभीनी अश्रुपूर्ण श्रृद्धांजलि ||

ह्रदय व्यथित है ...शब्द खो गए....मस्तिष्क शून्य है...
आशा की लौ बुझ गयी... दामिनी नहीं हारी , हारा है -
ये समाज , ये क़ानून और इंसानियत |
दामिनी, ईश्वर तुम्हारी बेचैन आत्मा को शांति दें |
अब सभी टीवी चैनल्स पर अपील की जा रही है - शान्ति बनाये रखें | 
उत्तेजित मत होइए....अपने ज़मीर को कुचल डालिए.... मूक बघिर बन जाइए...
आँखें, कान , मुँह , ज़बान सब बंद रखिये.... कोई प्रतिक्रया मत दीजिए.... ये सब होता रहता है.... आज दामिनी है, अमानत है...कल कोई और होंगी.... ये जीवन है ... एक हफ्ते बाद सब सामान्य हो जायेगा...
नपुंसक प्रशासन पंगु कानून व्यवस्था | लानत है |
 दिल्ली में दस मेट्रो स्टेशन बंद किये गए हैं, नयी दिल्ली में धारा 144 लगा दी गयी है , इण्डिया गेट के रास्ते में पूरा पुलिस बल लगा दिया गया है... ये सब करने से बेहतर आज ही उन हैवानो को फाँसी दे दो....वही होगा आक्रोश व् उत्तेजना का इलाज.... 
वही होगी दामिनी को सच्ची श्रृद्धांजलि |
6 बलात्कारियों में से एक Juvenile है .....
जिसे ना उम्र कैद की सज़ा दी जा सकती है ना ही फाँसी की, कैसा है ये क़ानून ...!!!!
जहाँ एक इंसान बलात्कार करने में सक्षम है लेकिन सजा के लिए "बच्चा" |
सर्वप्रथम मर्यादित हो पुरुष......एवं उसका आचरण | यदि वह घर की स्त्री की तरह ही पराई नारी का भी सम्मान करे, उसकी परवाह करे तो संभवतः समाज में नारी भी भयभीत ना रहे | यह जंगल नहीं है कि भेड़ियों से हर वक़्त डर बना रहे....हम सामजिक प्राणी हैं, नारी भी समाज में निर्भयता चाहती है | 
दिल्ली ही नहीं देश के हर हिस्से में बलात्कार की घटनाएं आम हैं । क्या नारी आज भी अबला ही है ???
समाज आत्ममंथन करे, व्यवस्था में सुधार आये , कोई कठोरतम कानून बने । स्त्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि हो ताकि फिर कोई दामिनी यूँ ना दम तोड़े, मानवता ना शर्मसार हो , फिर कोई दामिनी इस जानलेवा पीड़ा से न गुज़रे ।
ये आवाज़ ना हो जाये क्षीण ....ये सैलाब ना रुके .... 
हर नारी बने चंडी ... ये सिर किसी के आगे ना झुके....

- रोली पाठक