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Showing posts from January, 2011
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ना जाने क्यों ऐसे हालात हो गए हैं....
बदले-बदले से सबके, खयालात हो गए हैं...
हम तो पहले जैसे ही, अब भी हैं मगर...
बदले-बदले से सबके जज़्बात हो गए हैं....

वो निगाहें भी हैं बदली-बदली
अंदाज़ भी बदला सा लगता है,
मौसम के साथ बदल जाना,
सबके ऐसे,खयालात हो गए हैं...
बदले-बदले से सबके जज़्बात हो गए हैं....

बहुत खायी थीं कसमें,
वादे भी बहुत किये थे मगर,
अब तो पहचानते तक नहीं,
उफ़, ये कैसे हालात हो गए हैं....
बदले-बदले से सबके जज़्बात हो गए हैं...

-रोली पाठक
http://wwwrolipathak.blogspot.com/