Monday, November 29, 2010

याद....


धुली-धुली सी,उजली-उजली...

पानी में, बहती-बहती सी...

ख्वाबों में,डूबी-डूबी सी...

अश्कों में, लिपटी-लिपटी सी....

पीड़ा में, सिमटी-सिमटी सी.....



भीड़ में मुझको, तनहा करती....

तन्हाई में, रुसवा करती.....

यहीं-कहीं तेरे होने का,

मुझको है अहसास कराती.....



तेरी भीनी सी खुश्बू से ,

मुझको अक्सर ही महकाती....

अधरों पे,स्मित ले आती...

नैनो में, नीर भर जाती.....



सावन की, बूंदों सी शीतल....

तन-मन, भिगो-भिगो ये जाती....

जब-जब तेरी याद है आती....

जब-जब तेरी याद सताती...



रोली पाठक...


 http://wwwrolipathak.blogspot.com/..

Thursday, November 4, 2010

सन्देश...........

नन्हा सा दीप


पथ प्रदर्शक...

दीपोत्सव का

मूक दर्शक...

कार्तिक बयार से

लौ को बचाता...

जन-जन को यह

सन्देश पहुँचाता...

स्वयं जल के...

करो रौशन जग को,

तिल-तिल जल कर,

दो ख़ुशी सब को.....

हो भले अँधेरा

दीप तले...

देता उजाला हमें...

भले खुद जले.....

इक अँधेरे कोने में,

आओ हम भी दीप जलाएँ

रौशन करें,

किसी का जहाँ...

होंठों पे उसके मुस्कान लायें...

अपनी दीपावली संग,

किसी और का भी

त्योहार मनवायें.....

आओ हम भी दीप जलाएँ....

((मेरे सभी प्रिय व आदरणीय मित्रों को

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ....))

-रोली पाठक

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