Friday, July 29, 2011

हर अहसास को लफ़्ज़ों की ज़रूरत नहीं होती,
गर  होती न मोहब्बत तो ज़िन्दगी,
इतनी खूबसूरत नहीं होती.....

आँखें बंद करके देखा है जब-जब  तुम्हें,
 नींदों में  ख़्वाबों  की भी, ज़रूरत नहीं होती....

मिलकर भी दूर बैठे हो, क्यों ऐसी बेरुखी,
यूँ दूरियाँ भी तो कोई , शराफत नहीं होती....

ज़माने का है उसूल, मोहब्बत को रोकना,
तेरे लिए जो लड़ लूँ, वो बगावत नहीं होती..
हर अहसास को लफ़्ज़ों की ज़रूरत नहीं होती...

-रोली...

Sunday, July 10, 2011

 अक्षर-अक्षर पिरो-पिरो कर 
याद तेरी दिल में संजो कर...
सोच-सोच कर,कुछ शर्मा कर ....
सकुचा कर और बड़े जतन कर,
आज तुम्हें एक पत्र लिखा है....
प्रिये, तुम्हें एक पत्र लिखा है...


विरह की काली रातों का,
भूली बिसरी बातों का,
तेरी दी सौगातों का,
सावन की बरसातों का,
इस पाती में वर्णन है....
आज तुम्हें एक पत्र लिखा है....
प्रिये, तुम्हें एक पत्र लिखा है....

स्याही बने मोती अंसुअन के,
कागज़ कोरा ह्रदय था मेरा,
तेरे ख़याल,अक्षर बन उतरे,
जार-जार रोया मन मेरा....
मेरा यही समर्पण है....
आज तुम्हें एक पत्र लिखा है....
प्रिये, तुम्हें एक पत्र लिखा है....