याद....

धुली-धुली सी,उजली-उजली... पानी में, बहती-बहती सी... ख्वाबों में,डूबी-डूबी सी... अश्कों में, लिपटी-लिपटी सी.... पीड़ा में, सिमटी-सिमटी सी..... भीड़ में मुझको, तनहा करती.... तन्हाई में, रुसवा करती..... यहीं-कहीं तेरे होने का, मुझको है अहसास कराती..... तेरी भीनी सी खुश्बू से , मुझको अक्सर ही महकाती.... अधरों पे,स्मित ले आती... नैनो में, नीर भर जाती..... सावन की, बूंदों सी शीतल.... तन-मन, भिगो-भिगो ये जाती.... जब-जब तेरी याद है आती.... जब-जब तेरी याद सताती... रोली पाठक... http://wwwrolipathak.blogspot.com/ ..