Thursday, November 4, 2010

सन्देश...........

नन्हा सा दीप


पथ प्रदर्शक...

दीपोत्सव का

मूक दर्शक...

कार्तिक बयार से

लौ को बचाता...

जन-जन को यह

सन्देश पहुँचाता...

स्वयं जल के...

करो रौशन जग को,

तिल-तिल जल कर,

दो ख़ुशी सब को.....

हो भले अँधेरा

दीप तले...

देता उजाला हमें...

भले खुद जले.....

इक अँधेरे कोने में,

आओ हम भी दीप जलाएँ

रौशन करें,

किसी का जहाँ...

होंठों पे उसके मुस्कान लायें...

अपनी दीपावली संग,

किसी और का भी

त्योहार मनवायें.....

आओ हम भी दीप जलाएँ....

((मेरे सभी प्रिय व आदरणीय मित्रों को

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ....))

-रोली पाठक

http://wwwrolipathak.blogspot.com/

11 comments:

  1. बहुत सुन्दर संदेश्।
    दीप पर्व की हार्दिक शुभकामनायें।

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  2. अच्छी रचना
    आपको भी सपरिवार दिपोत्सव की ढेरों शुभकामनाएँ
    मेरी पहली लघु कहानी पढ़ने के लिये आप सरोवर पर सादर आमंत्रित हैं

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  3. बहुत अच्छा सन्देश,

    दीवाली की शुभकामनाएँ|

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  4. रोली जी अच्छी कविता! लगता है आपने इस कविता को दीवाली के लिए ब्लॉग पाठको के लिए छुपाकर रखा था !कविता के माध्यम से आपने जो सन्देश दिया वह उत्कृष्ट है !
    दीपमाला पर्व की आपको बहुत बहुत शुभकामनाये .......................

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  5. आपको और आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामाएं ...

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  6. खूबसूरत अभिव्यक्ति ..

    दीपावली की शुभकामनाएँ

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  7. चिरागों से चिरागों में रोशनी भर दो,
    हरेक के जीवन में हंसी-ख़ुशी भर दो।
    अबके दीवाली पर हो रौशन जहां सारा
    प्रेम-सद्भाव से सबकी ज़िन्दगी भर दो॥
    दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई!
    सादर,
    मनोज कुमार

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  8. "दीपावली की शुभकामनाएँ..........."

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  9. वंदना जी....धन्यवाद...
    आशीष जी...शुक्रिया...अवश्य पढूंगी आपकी लघु कथा...

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  10. पाताली, अमरजीत जी, संगीता जी, संजय भास्कर जी....आभार....

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  11. मनोज कुमार जी...धन्यवाद....बहुत खूबसूरत पंक्तियाँ...
    प्रणव जी....धन्यवाद :)

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