Saturday, June 25, 2011

असली-नकली....


सभी जीते हैं दोहरी ज़िन्दगी यहाँ,
हैरान हूँ रोज़ बदलते चेहरे देखकर...
सुनती थी साधू-संत मिलते हैं हिमालय में,
प्रवचन दे रहे आज वो, एसी में बैठकर....

वो जिनकी जेबें फटी थीं कल तक,
आज नोट उगल रहे उनके लॉकर....

पहचानते नहीं वो आज सुरक्षा घेरे में,
आये थे मांगने साथ हमारा, जो कल हाथ जोड़कर....

नकाब उतरा तो शैतान का था चेहरा,
आ रही थी ऊपर से जिसपर, मुस्कराहट नज़र...

 सभी जीते हैं दोहरी ज़िन्दगी यहाँ,
हैरान हूँ मै रोज़ बदलते चेहरे देखकर....

6 comments:

  1. यही है ज़िन्दगी का सच्…………हर शख्स के चेहरे पर एक चेहरा लगा है।

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  2. सच य दोहरी ज़िन्दगी जीने वाले बहुत तंग करते हैं।

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  3. धन्यवाद वन्दना जी और मनोज जी........

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  4. Satya_Wachan Roli Behan...

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  5. Nakabposho ne jina dushwar kar diya hai. Thik nishana sadha. Badhai

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