अधूरी दास्ताँ......

एक सदा थी, एक अदा थी एक हया थी, एक वफ़ा थी एक प्रेम का वादा था एक मज़बूत इरादा था एक सुहाना सपना था एक अफसाना अपना था एक राह भी थी, एक मंजिल भी... दो कोमल प्यार भरे दिल भी... एक तरफ सारा संसार एक तरफ था मेरा प्यार फिर, वही हुआ जो जग की रीत... जग जीता, और हारी प्रीत... बिछड़ गया मेरा मनमीत... बिछड़ गया मेरा मनमीत... -रोली पाठक