Sunday, April 17, 2011

वो ख़ुद एक आफ़ताब है,
 क्या ज़रूरत है उसे रौशनी की...
बुझा दो इन चिरागों को,
कि इनकी रौशनी जाया हो रही है.....
-रोली..
  

4 comments:

  1. शुक्रिया संजय जी...

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  2. न चान्द दिखेगा न तारे टिमटिमायेंगे
    सूर्य के आगे दीप खुद गुल हो जायेंगे

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