Saturday, April 16, 2011

 अपनों के दिए ज़ख्म अक्सर
नासूर बन जाते हैं....
 वक्त ही होता है मरहम 
इस तरह के ज़ख्म का...
शूल से चुभ के दिल में जो,
जिंदगी में उतर आते हैं....
-रोली......

2 comments:

  1. बिलकुल सही कहा आपने.

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  2. यशवंत जी...शुक्रिया...

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