अपनों के दिए ज़ख्म अक्सर
नासूर बन जाते हैं....
 वक्त ही होता है मरहम 
इस तरह के ज़ख्म का...
शूल से चुभ के दिल में जो,
जिंदगी में उतर आते हैं....
-रोली......

Comments

  1. बिलकुल सही कहा आपने.

    ReplyDelete
  2. यशवंत जी...शुक्रिया...

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

सुहाना सफर

गर्मी की छुट्टियां

कश्मीर की सरकार से गुहार..

मेरी नन्ही परी....

जय माता दी.....

यात्रा-वृत्तांत......

वसुंधरा......

तन्हाई

स्मृति-चिन्ह