
हर अहसास को लफ़्ज़ों की ज़रूरत नहीं होती, गर होती न मोहब्बत तो ज़िन्दगी, इतनी खूबसूरत नहीं होती..... आँखें बंद करके देखा है जब-जब तुम्हें, नींदों में ख़्वाबों की भी, ज़रूरत नहीं होती.... मिलकर भी दूर बैठे हो, क्यों ऐसी बेरुखी, यूँ दूरियाँ भी तो कोई , शराफत नहीं होती.... ज़माने का है उसूल, मोहब्बत को रोकना, तेरे लिए जो लड़ लूँ, वो बगावत नहीं होती.. हर अहसास को लफ़्ज़ों की ज़रूरत नहीं होती... -रोली...