सिला...

किसी को दिल से चाहने का मिला ये सिला है
हमें भी अपने गैर होने का आज बेहद गिला है

मुन्तज़िर रहीं जिसके लिए हमेशा ये निगाहें
दरमियाँ उनके ही आज सदियों का फासला है....

 सेहरा में साथ तेरे खामोश चलते रहे हम भी
मंजिल पे जा कर जाना दुश्मन का काफिला है....

तसव्वुर में बसाया था जिसे सबसे छुपा कर
पाया कि नक़ाब में नदीम के रक़ीब मिला है....!!!

- रोली

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

सुहाना सफर

गर्मी की छुट्टियां

कश्मीर की सरकार से गुहार..

मेरी नन्ही परी....

जय माता दी.....

यात्रा-वृत्तांत......

वसुंधरा......

तन्हाई

स्मृति-चिन्ह