Tuesday, December 31, 2013

मै !

अब ढूँढना है खुद को
ज़र्रे-ज़र्रे में..............
अंधकार में
यादों में
कसमो में
वादों में
लफ्ज़ों में
इरादों में
सवालों में
जवाबों में
नींदों में
ख्वाबों में
नफरत में
चाहतों में
तेरी आँखों में
तेरी पनाहों में
कहीं तो मिलूंगी खुद को मै !
खुद से बिछड़ी हुयी - मै !

- रोली

3 comments:

  1. खुद को पाने की राह में अनगिन फूल खिलें!
    शुभकामनाएं!

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    1. अनुपमा जी ,
      शुक्रिया :)
      नव वर्ष की अग्रिम बधाई एवं शुभकामनायें |

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  2. बेहतरीन अभिवयक्ति.....

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