Friday, March 7, 2014

आह्वान

बदले जग पर, तुम न बदलना, तुम ऐसी ही रहना
मेरे  ऊसर से  जीवन में, सरिता  बन  तुम बहना
बदलें नाते, तुम ना बदलना, तुम ऐसे  ही रहना…

सह लूंगी मै जग की और हर रिश्ते की कड़वाहट
मधुर चाँदनी बन कर तुम, जीवन में  मेरे रहना
दुनिया बदले, तुम न बदलना तुम ऐसे  ही रहना ....

निविड़-कालिमा बीच मुझे तुम, उजियारा दिखलाना
अँधियारी जीवन-रजनी में , तुम दीपक बन जाना
भूलें अपने , तुम ना भूलना , सब दिन अपना कहना
बदले जग पर, तुम न बदलना , तुम ऐसे ही रहना…....

- रोली पाठक


2 comments:

  1. निविड़ कालिमा बीच मुझे तुम दिखलाना

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    1. धन्यवाद राकेश जी |

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