Tuesday, April 6, 2010

महाकुम्भ का तीसरा शाही स्नान


महाकुम्भ का पावन अवसर...उस पर चैत्र पूर्णिमा व हनुमान जयंती...
और शाही स्नान! जहाँ एक ओर भारत के कंदर-गुहाओं, जंगल-पर्वतों
से निकल-निकल कर साधू-संत हरिद्वार आये हुए हैं वहीँ आस्था एवं
गंगा का तीव्र प्रवाह भीड़ की शक्ल में "हर की पैड़ी" पर उमड़-उमड़
जा रहा है! जीवन में कितने भी पाप किये हों, गंगा मैया की एक डुबकी
उद्धार कर देगी! सारे पाप धुल जायेंगे, इस विश्वास के साथ जन-समूह उमड़ा
पड़ रहा है, जिसमे अधिकतर ग्रामवासी हैं!प्रातः काल ३ बजे से आम लोगों
का स्नान आरंभ हुआ, आज जो गंगा मैया में स्नान करेगा वह सीधा बैकुंठ
जायेगा! हिमगिरी से निकली गंगा का हिम सा शीतल जल भी लोगों के निश्चय
को डिगा नहीं पा रहा था....प्रातः ९ बजे तक ये स्नान चला उसके पश्चात्
अखाड़ोंका स्नान आरंभ होगा! जूना अखाडा, निर्मल अखाडा, निरंजन अखाडा,
अग्नि अखाडा,महानिर्वानी अखाडा, अटल अखाडा, आनंद अखाडा एवं अन्य
साधू-संतों के ये समूह बड़े-बड़े सजे-धजे रथों,गाड़ियों,हाथी-घोड़े में सोने-चांदी
से सुसज्जित सुन्दर छत्र लगाये अपने गुरुओं के साथ आपने अखाड़ों का वैभव
के साथ शक्ति प्रदर्शन करते हुए शान से हर की पैड़ीस्थित ब्रम्ह कुंड की ओर
कूच कर रहे हैं!आज हरिद्वार में कोई वाहन नहीं चल रहा है, सभी को पद
यात्रा करनी है,ना रिक्शा,ना ऑटो,वहां के रहवासियों की गाड़ियों पर भी
पाबंदी है क्योंकि आज शाही-स्नान है! सिर्फ अखाड़ों की गाड़ियाँ चलेंगी...बस!
९ बजे आमजन को बाहर निकाल कर सम्पूर्ण घाट की सफाई की गई!
अब आरंभ हुआ अखाड़ों का शाही-स्नान! नागा साधू हर अखाड़ों का मुख्य
आकर्षण होते हैं,तन पर भस्म लपेटे, उलझी लम्बी-लम्बी जटायें,
माथे पे रक्त-चन्दनका लेप,हाथ में चिमटा,त्रिशूल-भाले या अन्य कोई
हथियार लिए अपने-अपने अखाड़े की अगुवाई करते नाचते-झूमते शिव बारात
से ये शिवगण हर-हर गंगे, बम-बम भोले का जयकार करते चले जा रहे हैं...
साँय ६ बजे तक अखाड़ों का स्नान चला, फिर शुरू हुई गंगा मैया की आरती...
अदभुत द्रश्य!गंगा-जल में नन्हे-नन्हे असंख्य दीपक तैरते हुए विहंगम द्रश्य
उत्पन्न कर रहे हैं....पवित्र गंगा मैया की पावन ओजपूर्ण आरती समाप्त हुई
और पुनः रात्रि ८ बजे आमजन का स्नान आरंभ हुआ, जो देर रात्रि चला....
साधू-संतों द्वारा स्नान किये गए ब्रम्ह कुंड का महत्त्व और बढ़ गया!
अगाध श्रद्धा, ईश्वर के प्रति गहरी आस्था, विश्वास एवं भक्ति का समागम देखने मिला!
प्रशासन पूरी तरह चुस्त,चौकन्ना एवं सावधान! भारी भीड़ किन्तु कहीं कोईअव्यवस्था नहीं..!
बाहर से आये सभी तीर्थ-यात्रियों की यथासंभव सहायता करने को पुलिस एवं प्रशासन!
महाकुम्भ के तीसरे शाही स्नानमें शामिल हो पाने का ये सुखद अनुभव सदा याद रहेगा!

-रोली पाठक
http://wwwrolipathak.blogspot.com/

4 comments:

  1. "welcome back....असीमित आनन्द आया होगा आपको महाकुम्भ में, सचमुच बहुत ही विलक्षण होगा इतने सारे लोगों को एक साथ देखना, क्या अनुशासन होता है इन दिनों और साधु-संतों का तो क्या कहना जैसा कौतुहल हज़ारों वर्षों पहले था उनके प्रति वो आज भी बरकरार है...मैने एक बड़ा कार्टून बनाया था पिछ्ले साल कुम्भ पर....हर की पैड़ी का चित्र शानदार है एकदम जीवंत....उम्मीद है कि आपके यादगार अनुभव केवल एक पोस्ट तक ही सीमित नहीं रहेंगे...बहुत बढ़िया पोस्ट......"

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  2. प्रणव जी,
    धन्यवाद! वाकई अविस्मर्णीय अनुभव था...
    हमारे देश में भक्ति,श्रद्धा एवं आस्था देखनी हो
    तो महाकुम्भ में देखिये! महाकुम्भ ही क्यों,
    स्वर्ण मंदिर,हृषिकेश स्थित राम झूला,
    लक्ष्मण झूला, वाघा बार्डर हर जगह मैंने
    लोगों का भावात्मक लगाव देखा...गर्व है मुझे
    ऐसे देश में मेरा जन्म हुआ!

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  3. काबिलेतारीफ है प्रस्तुति।.सारी रचनाये आपकी बहुत ही अच्छी है|

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