Sunday, May 8, 2011

(मदर्स डे पर अपनी व हर माँ को समर्पित )

माँ बनकर ही जाना सच्चा प्रेम किसे कहते हैं....
जिसके आँचल तले बचपन गुज़र गया....
वे हाथ अब भी मुझे आशीष देते हैं...
माँ हैं, नानी हैं और दादी हैं वो,
हर रूप में वो हमें अथाह प्यार देते  हैं...
माँ बनकर ही जाना, सच्चा प्रेम किसे कहते हैं...
जब छोटे थे, माँ से प्यार बहुत था,
अब जाना माँ का प्रेम, समर्पण,सेवा...
रातों को जाग-जाग कर, बच्चों को सपने देते हैं....
माँ बनकर ही जाना, सच्चा प्रेम किसे कहते हैं......

6 comments:

  1. एहसासों को महसूसते खूबसूरत रचना

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  2. बहुत अच्छा लिखा है आपने.

    सादर

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  3. bhut khubsurat ehsaaso se bhari rachna... happy mothers day...

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  4. Shukriya Sangeeta ji...Yashwant ji aur Sushma ji...

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  5. बहुत ही प्यारी कविता.

    सादर

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  6. आभार यशवंत जी......

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