Monday, March 26, 2012

हवायें सारी रात खिड़कियाँ खड़खडाती रही
मेरी आँखों से तेरी याद मेरी नींदें चुराती रही...
उठा कर उनींदी पलकें,चाँद को ताकते पाया,
चाँदनी कहानी मेरी, सितारों को सुनाती रही...
झील के ठहरे हुए पानी सा थम गया वक़्त,
दूर कहीं कोई माँ, बच्चे को लोरी सुनाती रही...
हौले-हौले मोती बन के उतर आयी तेरी याद,
बन के आँसू मेरी आँखों में समाती रही........
-रोली....

3 comments:

  1. Bahut Khoob Roli ji...Kitni gehraai hai is mein...Beautiful !!!

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  2. Replies
    1. यशवंत जी व् मेरे अनाम मित्र......शुक्रिया आपका |

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