खामोश सर्द शाम आती है तेरे ख़याल लेकर
उनकी गर्माहट में हम तो डूबते ही जाते हैं
अलाव की आंच भी बुझ जाती है और हम
ठंडी राख में तेरी गुनगुनी यादों को पाते हैं

- रोली


Comments

  1. प्रिय ब्लागर
    आपको जानकर अति हर्ष होगा कि एक नये ब्लाग संकलक / रीडर का शुभारंभ किया गया है और उसमें आपका ब्लाग भी शामिल किया गया है । कृपया एक बार जांच लें कि आपका ब्लाग सही श्रेणी में है अथवा नही और यदि आपके एक से ज्यादा ब्लाग हैं तो अन्य ब्लाग्स के बारे में वेबसाइट पर जाकर सूचना दे सकते हैं

    welcome to Hindi blog reader

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