Tuesday, March 2, 2010

होली शुभ हो....


फागुन की बयार, रंगों की फुहार
सरसों पीली, चूनर गीली..
अबीर-गुलाल
हरे,पीले,लाल..
राधा चली पनघट
किशन जमना तट
राधा को न भाएँ रंग ये हजार
एक बस श्याम रंग
उसे लुभाता है
लाल,हरे पीले रंग में
बस श्याम नज़र आता है....
आप सभी को होली की इन्द्रनुषी शुभकामनाएं....
-रोली पाठक.
http://wwwrolipathak.blogspot.com/

1 comment:

  1. "ये छोटी-सी कविता वाकई में रंग-बिरंगी थी....."
    amitraghat.blogspot.com

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