Tuesday, March 9, 2010

महिला आरक्षण का प्रथम चरण विजयी...


जीत गयी फिर नारी शक्ति
असुरों की फिर हार हुई,
था श्रृंगार कभी चूड़ी का
आज वही तलवार हुई,
मूक-बघिर है उसका जीवन
ज्यों ही उसको बोध हुआ,
ओज वाणी में ऐसा आया,
मानो धनुष टंकार हुई
अबला,महिला,वनिता, कामिनी
कहलाया करती थी वो..
दुर्गा,चंडी,चामुंडा का
साक्षात अवतार हुई..
क्षीण ध्वनि और कातर द्रष्टि,
सहमा-सहमा था तन-मन,
आज मिली है शक्ति उसको
दुनिया में जयजयकार हुई..
जीत गयी फिर नारी शक्ति,
असुरों की फिर हार हुई...
-रोली पाठक.
http://wwwrolipathak.blogspot.com/

8 comments:

  1. "रोली जी आरक्षण तो अभी भी दूर की कौड़ी लगती है पर बात कविता की तो मुझे तो इस प्रकार की कविता लिखने के लिये बहुत मेहनत करनी पड़ती है जिसमे तुक बंदी हो एक जैसे स्वर क्योंकि फिर इसमें सीमित शब्दों से काम चलाना पड़ता है , पर कविता बेहद अच्छी है आरक्षण से ना भी जोड़ें तो भी अपने आप में मुकम्मल है साथ में वो छोटा -से शेर को पढ़ने मे मज़ा आया,"चन्दा की डोली" में पूनम जी भूलवश मेरा नाम लिख गईं हैं........."
    प्रणव सक्सैना
    amitraghat.blogspot.com

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  2. आपको जीत की बधाई. उम्मीद करता हूँ कि यह जीत जमीनी सच्चाई में परिवर्तित होगी.
    ...शुभकामनाएँ.

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  3. असुर बोले तो लालू यादव, शरद यादव, मुलायम सिंह यादव............

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  4. स्वानो को मिलता दूध भात भूखे बालक अकुलाते हैं,
    माँ की हड्डी से चिपक ठिठुर जाड़ों की रात बिताते हैं,

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  5. भाभी निम्न पकंतिया वह तोड़ती पत्थर से ली गई है जिसमे एक माँ फुटपाथ पे मजदूरी करके अपने बच्चे को ठण्ड से बचाती है स्वान यानि कुत्ता ,अब आप बताओ की महिलाओ को आराक्षढ़ मिलने पे क्या बाकी गरीब महिलाओ को इसका फायदा मिलेगा या फिर राजनीती के लिए महिलाओ को इस्तेमाल किया जायेगा ,राज्य सभा में बिल पास करने से जीत नहीं मानी जाएगी जीत तब होगी जब हर नारी अपने आप को सशक्त बनाये इंदिरा जी की तरह , तब इस बिल के पास होने पे ख़ुशी मनाई जाये ,अभी तो ये लग रहा है की जैसे राजनेता अपनी स्वार्थ की रोटी नारी के नाम पे बना रहे हो , जय हिंद.........

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  6. देवेन्द्र जी,
    धन्यवाद...
    हम होंगे कामयाब एक दिन.

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  7. विशाल..
    ब्लॉग में आपका स्वागत है!
    गरीब और अमीर या अनपढ़ एवं पढ़ी-लिखी महिलाएं क्या होती हैं?
    ये आरक्षण सब पर लागू होगा, बिना किसी भेद-भाव के! अब हरेक के पास शक्ति है खुद को साबित करने की, अपनी काबलियत दिखाने की!हाँ ये अवश्य है की इस आरक्षण का लाभ उन पुरुषों को भी मिलेगा जो अपने घर की महिलाओं को आगे करके रिमोट कण्ट्रोल अपने हाथ में रखेंगे, लेकिन ये एक शुरुआत है! ये क्रांति आने वाले वर्षों में महिलाओंके लिए बेहद फायदेमंद साबित होगी! कुछ देर को हम मान भी लें की पढ़ी-लिखी महिलाओं को इसका ज्यादा फायदा मिलेगा तो भी विशाल, वो महिलायें भी तो महिलाओं के हित के लिए ही काम करेंगी ना!
    असुरों के नाम पूछे हैं आपने....क्या बताने की ज़रूरत है???? :)

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  8. प्रणव जी, नमस्कार..
    जी हाँ, मै समझ गयी थी पूनम जी भूलवश आपका नाम लिख बैठीं!कविता की तुकबंदी की प्रशंसा के लिए धन्यवाद...दरअसल मै
    इस मामले में आपसे उलट हूँ,जब तक तुकबंदी ना हो मेरी कविता
    आगे ही नहीं बढ़ पाती!रहा आरक्षण का प्रश्न,तो लगता है-
    अब दिल्ली दूर नहीं!

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