Thursday, September 15, 2011


पूनम की रात....
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रात ढल रही,
छोड़ दो कुछ देर
चाँद को तनहा...
वो भी इतरा ले,
सितारों के बीच..........

चाँदनी को भी आज,
होने दो उसकी,
पूर्णता का एहसास ...
कि आज चाँद आसमाँ पर,
बड़े रुआब से है....

चाँद को करने दो गुमान,
कि उसकी पूर्णता से,
चाँदनी भी आज अपने,
पूरे  शबाब पर है.........

-रोली...

9 comments:

  1. Roli Pathak ji
    sundar rachna ke liye badhai sweekaren.
    मेरी १०० वीं पोस्ट , पर आप सादर आमंत्रित हैं

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    ब्लॉग पर यह मेरी १००वीं प्रविष्टि है / अच्छा या बुरा , पहला शतक ! आपकी टिप्पणियों ने मेरा लगातार मार्गदर्शन तथा उत्साहवर्धन किया है /अपनी अब तक की " काव्य यात्रा " पर आपसे बेबाक प्रतिक्रिया की अपेक्षा करता हूँ / यदि मेरे प्रयास में कोई त्रुटियाँ हैं,तो उनसे भी अवश्य अवगत कराएं , आपका हर फैसला शिरोधार्य होगा . साभार - एस . एन . शुक्ल

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  2. शुक्ला जी, रेखा जी.....शुक्रिया...

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  3. बहुत ही सुंदर पंक्तियाँ।

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  4. नीलेश जी ...बहुत-बहुत धन्यवाद....

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  5. सागर जी...शुक्रिया .

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