Saturday, October 29, 2011

 तेरी आँखों के पानी को,
अपनी पलकों में उतार लूँ ,
ज़िन्दगी की हर ख़ुशी
तुझपे वार दूँ  ,
मेरे अश्कों से गर
धुलती हैं गलतियां मेरी,
तो लगा कर झड़ी तेरे आँगन में,
इक सावन उतार दूँ ............

-रोली...
  

6 comments:

  1. वाह बहुत सुन्दर भावाव्यक्ति।

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  2. सुन्दर प्रस्तुति , बधाई.

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  3. वंदना जी, शुक्ल जी......बहुत बहुत धन्यवाद..

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  4. बहुत बहुत आभार.....आप सभी मित्रों का..

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