Friday, February 17, 2012

अंतिम सत्य......................
जहाँ न हो कोई अपना
एक अँधेरी कन्दरा
बाहर पुकारते हमारे अपने,
उनकी चीखें, क्रंदन-रुदन,
और हमारी आवाज़ घुटती सी.........
जिस्म का लहू जमता सा,
देह ठंडी होती सी...
एक असहनीय पीड़ा
और...........................अंत.

-रोली

3 comments:

  1. जीवन का कटु सत्य है....

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    1. जी सुषमा जी.............

      मृत्यु |

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  2. Ek bahut badi sachaai...Very Nice

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