विश्व महिला दिवस !!!


हम सिर्फ आज ही के दिन नारी के अधिकार व उसके अस्तित्व की बातें करते हैं, क्यों ?
नारी जननि है | घर की इज्ज़त है | पिता का अभिमान, भाई का मान व ससुराल का सम्मान है, जिस पर कभी ठेस नहीं लगनी चाहिए , किन्तु वह स्वयं के लिए क्या है ???
महिलाएं कई प्रकार की होती हैं - शिक्षित महिलाएं, आत्म-निर्भर महिलाएं, घरेलू महिला, समाज-सेविका, संघर्षरत महिला, ग्रामीण महिला, दमित महिला, क्रांतिकारी नारी , समाज सेविका, उपभोग के लिए उपलब्ध नारी, उच्च पदस्थ महिला, राजनीति में सक्रीय नारी , मजदूर स्त्री आदि-आदि |
शहरों व महानगरों की महिलाएं निश्चित ही काफी हद तक स्वतंत्र हैं |
रहन-सहन, वेश-भूषा, निर्णय लेने के अधिकार, आत्मनिर्भरता यह सब उनके अधिकार क्षेत्र में है किन्तु नारी तो वो भी है जो हाथ भर का घूँघट निकाल कर आज भी डोली में बैठ कर जिस देहरी के अंदर आती है, उसकी अर्थी ही उसे लांघ पाती है | इसके बहुत से कारण है -
अशिक्षा , रूढिवादिता , दकियानूसी परम्परायें |
जींस पहन कर फर्राटेदार अंग्रेजी बोलना आधुनिकता नहीं है | फेसबुक, ट्विटर, कम्पूटर, लैपटॉप, टैब , मोबाइल आदि की अधिकतम जानकरी रखना आधुनिकता नहीं है |
स्वतंत्रता या आधुनिकता है - विचारों का आधुनिकरण | यदि कोई स्त्री स्वयं को स्वतंत्र मानती है, अपना एक अस्तित्व बनाये रखना चाहती है तो आज के दौर में नारी उत्थान के लिए ही कुछ करना अत्यावश्यक है |
आज नारी ही नारी का भला करे, इस सोच को बढ़ाना है | अनपढ़ को शिक्षित करने का बीड़ा उठाया जाए | समाज की कुरीतियों जैसे - बाल विवाह, कन्या भ्रूण ह्त्या आदि का पुरजोर विरोध कर इन्हें पोलियो की भाँति ही जड़ से उखाड़ फेंकने का संकल्प लेना चाहिए |
विधवा विवाह, महिला शिक्षा आदि का समर्थन हमें खुले विचारों के साथ करना चाहिए, ना कि आलोचना के साथ |
एक महिला होने के नाते ना हमें पुरुषों से बराबरी के विषय में सोचना चाहिए, ना ही उनसे कोई प्रतियोगिता रखना चाहिए , क्योंकि तुलनात्मक अध्ययन ही गलत है | प्रकृति ने पुरुष व स्त्री दोनों को समान बनाया है | हम अपनी राह पर चल कर मंजिल प्राप्त करें | समय-समय पर जिस तरह पुरुष नारी को संबल देता है , उसी तरह नारी भी सहभागिता के चलते उसे दुश्मन ना समझ कर सहयोगी, मित्र व सखा के रूप में ग्रहण करें, तब "महिला दिवस" मनाने की नौबत नहीं आएगी, क्योंकि "पुरुष दिवस" नहीं होता |
हम सकारात्मक व स्वतंत्र सोच रख कर चलेंगे तो हमारा हर दिन - "महिला दिवस" होगा |

- रोली पाठक




Comments

  1. सार्थक अभिव्यक्ति।
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा शनिवार (9-3-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
    सूचनार्थ!

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    1. बहुत-बहुत धन्यवाद वंदना जी | आभार |

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  2. सटीक और सार्थक विचार, आप भी मेरे ब्लोग्स का अनुशरण करे ,ख़ुशी होगी
    latest postमहाशिव रात्रि
    latest postअहम् का गुलाम (भाग एक )

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    1. कालिपद जी...धन्यवाद | अवश्य अनुसरण करुँगी |

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  3. Replies
    1. शुक्रिया अमृता जी |

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  4. सार्थक रचना ! अच्छी प्रस्तुति!
    ~सादर!!!

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    1. अनीता जी , बहुत-बहुत धन्यवाद |

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  5. बहुत सुन्दर और सारगर्भित प्रस्तुति...

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    1. शर्मा जी,
      बहुत-बहुत धन्यवाद |

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