जाड़े में कम्बल की तरह
जेठ माह में शीतल हवा...
इक ढाल की तरह बुरी नज़रों से बचाता
प्रेम लुटाता ईश्वर की तरह.... - "पिता"

- रोली

Comments

Popular posts from this blog

सुहाना सफर

गर्मी की छुट्टियां

कश्मीर की सरकार से गुहार..

मेरी नन्ही परी....

जय माता दी.....

यात्रा-वृत्तांत......

वसुंधरा......

तन्हाई

स्मृति-चिन्ह