पहले अपने हुए...फिर बहुत अपने...और अब गैर हो रहे हैं
कैसा है ये अजब दस्तूर ज़माने का, अपनों से बैर हो रहे हैं ..

- रोली...

Comments

  1. खुबसूरत अभिवयक्ति.....

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  2. Yeh dastoor chalta raha hai...aur chalta rahega...Behtreen..

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